50 करोड़ किलोमीटर तक लिफ्ट लेकर जायेंगे मिनी सेटेलाइट

मंगल पर जाने की तैयारी जोरों पर चल रही है। नासा अपने जिस मार्स एक्सप्लोरर को मंगल पर भेज रहा है, उसके साथ दो छोटे सेटेलाइट – वाल ई और ईव भी अंतरिक्ष में जायेंगे। यानी मार्स एक्सप्लोरर अकेला नहीं होगा, उसका साथ देने के लिए ये दो मिनी सेटेलाइट भी होंगे। इनके नाम 2008 में आयी एक एनीमेशन मूवी में दिखाये गये करेक्टर्स पर आधारित हैं। मार्स एक्सप्लोरर का नाम है मार्स इनसाइट लैंडर। दोनों साथी सेटेलाइट एक ब्रीफकेस के आकार के हैं। ऐसा पहली बार होगा कि क्यूब के आकार के नन्हें सेटेलाइट किसी बड़े मिशन में शिरकत करेंगे। छोटे आकार के कारण ही इन्हें कहा भी क्यूबसेट्स जाता है।

मिनी सेटेलाइट मंगल तक जायेंगे

इन नन्हें सेटेलाइट्स के साथ मार्स इनसाइट लैंडर की पूरी यात्रा करीब 50 करोड़ किलोमीटर की होगी, जिसमें साढ़े 6 माह का समय लगेगा। जो छात्र मंगल संबंधी कई तरह के प्रयोग करने के इच्छुक हैं, उनकी सहूलियत के लिए ऐसे नन्हें सेटेलाइट्स को बड़े मिशन के साथ भेजे जाने की योजना बनायी गयी, ताकि अलग से कोई बड़ी रकम का इंतजाम न करना पड़े और साइड रिसर्च भी होती चले। अभी तक अनेकों नन्हें सेटेलाइट पृथ्वी की कक्षा तक ही जा पाते थे। उससे आगे के लिए उनके पास कोई चारा नहीं होता था। परंतु, मंगल के मिशन में पहली बार इन नैनो सेटेलाइट्स को लंबी यात्रा करने का मौका मिलेगा।

चंद्रमा की सैर भी हो रही है

इस बीच, यूरोपियन स्पेस एजेंसी के मिनी सेटेलाइट चंद्रमा की सैर कर रहे हैं। इनमें से एक चंद्रमा की दूर वाली साइड का मुआयना करेगा, तो दूसरा वहां एक क्रेटर की पड़ताल करेगा। वह क्रेटर हमेशा छाया में ही रहता है, इसलिए वहां के हालचाल नहीं मिल पाते हैं।

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