वैज्ञानिकों को मिल गया दिमाग में मौजूद चिंता का बटन

हम हर समय सुरक्षित महसूस करने के लिए नहीं बने हैं, लेकिन शायद एक दिन हम ऐसे हो सकते हैं। मस्तिष्क में चिंता के कारण की जांच करने के दौरान हिप्पोकैम्पस में मौजूद ‘चिंता कोशिका’ की पहचान कर ली गयी है, जो न केवल चिंतित व्यवहार को नियंत्रित करती है, बल्कि प्रकाश के एक बीम द्वारा इसे भी कंट्रोल किया जा सकता है। लैब में चूहों पर किये गये प्रयोगों से मिले निष्कर्ष, दुनिया भर के लाखों ऐसे लोगों के लिए उम्मीद की किरण साबित हो सकते हैं, जो चिंता संबंधी विकारों का अनुभव करते हैं। अमेरिका में हर पांच में से एक व्यक्ति चिंता से ग्रस्त है। शोधकर्ताओं में से एक, सैन फ्रांसिस्को स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया के न्यूरोसाइंटिस्ट, मज़ेन खेरबेक कहते हैं- हम समझना चाहते थे कि मस्तिष्क के भीतर चिंता के दौरान पैदा होने वाली भावनात्मक जानकारी कहां पर एन्कोड होती है।

खुले स्थानों पर होने की चिंता-

इसका पता लगाने के लिए, टीम ने कैल्शियम इमेजिंग नामक एक तकनीक का उपयोग किया, जिसमें हिप्पोकैम्पस में कोशिकाओं की गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए प्रयोगशाला में चूहों के दिमाग में लघु सूक्ष्मदर्शी डाले गये। टीम ने विशेष मैज बनाए, जहां कुछ मार्गों पर ऊंचे और खुले प्लेटफार्म बना दिये, जिनसे चूहों को चिंता होने लगी, क्योंकि ऐसे स्थानों पर शिकारी आकर उन पर हमला कर सकते थे। जब चूहों को चिंता हो रही थी, तभी हिप्पोकैम्पस के एक हिस्से में कोशिकाओं में सक्रियता देखी गयी। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सीनियर रिसर्चर रीन हेन बताते हैं- हम इन कोशिकाओं को एंग्जायटी सेल कहते हैं, क्योंकि ये केवल तब सक्रिय होती हैं, जब जानवर डरते हैं।

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