मंगल ग्रह पर दो उन्नत सभ्यताओं के बीच हुआ था परमाणु युद्ध, आज भी जारी हैं विस्फोट

दूसरे ग्रह पर जीवन है या नहीं, यह रहस्य कोई नहीं जानता है। वैज्ञानिक भी अब तक खोजबीन में ही जुटे हैं। कभी दूसरे ग्रह पर जीवन की कुछ संभावना दिखती है तो वैज्ञानिक उस दिशा में ही खोज करने लगते हैं। हालांकि एक वैज्ञानिक काफी पहले ही बड़ा दावा कर चुके हैं। उनका कहना है कि मंगल ग्रह पर दो उन्नत सभ्यताएं थीं जिनके बीच परमाणु युद्ध हुआ था। उनका कहना है कि इसके सबूत भी वहां मौजूद हैं।

प्लाज्मा भौतिक विज्ञानी जॉन ब्रैंडन बर्ग ने कुछ समय पहले एक ऐसी थ्योरी दी थी जिसने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया था। उन्होंने अपनी थ्योरी में दावा किया था कि प्राचीन समय में मंगल ग्रह पर एक उन्नत सभ्यता रहती थी जिसका विज्ञान हमारे विज्ञान से सैकड़ों साल आगे था। उनका दावा था कि यह सभ्यता बाहर से आई दूसरी सभ्यता के परमाणु हमले में खत्म हो गई थी।

भौतिक विज्ञानी जॉन ब्रैंडन बर्ग का दावा था कि मंगल पर दो सभ्यताओं के बीच परमाणु युद्ध लड़ा गया था। इसमें दूसरी सभ्यता के परग्रही किसी दूसरे ब्रह्मांड से आये थे। हमलावरों और मंगल पर बसी सभ्यता के बीच भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध में ऐसे घातक परमाणु बमों का इस्तेमाल किया गया था जिनमें एक परमाणु बम की शक्ति सैकड़ों हाइड्रोजन बमों के बराबर थी |

पेश किये थे चौंकाने वाले सबूत-

अगर मंगल पर गौर करें तो मंगल ग्रह के वातावरण, रासायनिक दशा और वहां पाये गये संदिग्ध स्ट्रक्चर को देखकर जॉन ब्रैंडन के दावे में दम लगता है। उन्होंने कुछ सबूत भी पेश किये थे जिन पर गौर करें तो लगता है कि हमारी गैलेक्सी में सबसे पहले मंगल ग्रह पर ही परमाणु युद्ध हो चुका है। उन्होंने मंगल पर जीवन और परमाणु युद्ध की थ्योरी को साबित करने के लिए सबूत भी दिये थे।

परमाणु बम के अवशेष हैं मौजूद –

जॉन ब्रैंडन ने अपनी थ्योरी में बताया था कि मंगल ग्रह पर एक परत है जो उसको ढकी हुई है। यह परत रेडियो एक्टिव तत्व से बनी है। इसमें थोरियम, रेडियम और पोटेशियम मुख्य तत्व मौजूद हैं। जॉन का दावा है कि मंगल पर रेडियोएक्टिव चट्टानें भी मौजूद हैं। इनमें डिनेटाइड और जेनिन जैसे तत्व भी मिले हैं। जॉन का कहना है कि ये दोनों तत्व परमाणु विस्फोट से पैदा होते हैं।

मंगल की रेडिएशन मैपिंग भी है बड़ा सबूत-

भौतिकशास्त्री ब्रैंडन का दावा था कि मंगल की जो रेडिएशन मैपिंग है, वो भी बहुत कुछ बताती है। इसके रेडिएशन की गामा किरणें मंगल पर मलबा फैलाती दिखाई देती हैं। वैज्ञानिक का दावा था कि यहां जो परमाणु विस्फोट किया गया उसकी शक्ति 10 लाख मेगा टन वाले हाइड्रोजन बम जितनी रही होगी। इस विस्फोट ने यहां रहने वाली ह्यूमनोइड सभ्यता को नष्ट कर दिया होगा।

2014 में भारत के मंगल यान के सबूत से होने लगा भरोसा-

ब्रैंडन की इस थ्योरी को काफी समय तक बस कल्पना माना जाता रहा। लेकिन अचानक 2014 में इस दावे का ऐसा सबूत मिला जिसने वैज्ञानिकों को इस ओर सोचने पर मजबूर कर दिया। 2014 में भारत के मंगल यान ने वहां की एक तस्वीर भेजी। मंगल यान ने वहां के एक इलाके वेलिस मेरिनियरी स्कैनियम के 4000 किमी में हुए विस्फोट की एक तस्वीर भेजी जिससे हड़कंप मच गया।

साफ-साफ दिखा परमाणु विस्फोट जैसा मशरूम क्लाउड-

मंगल यान ने जिस इलाके में हुए बड़े विस्फोट की तस्वीर भेजी वो काफी हैरान करने वाली थी। उस तस्वीर में विस्फोट से हुए मशरूम क्लाउड की फोटो दिखी थी। इसके बाद ही थ्योरी पर यकीन करने वाले लोगों ने कहा कि ये परमाणु विस्फोट की ही तस्वीरें हैं। उनका दावा था कि मंगल ग्रह पर चेन रिएक्शन सिद्धांत की वजह से इस तरह के परमाणु विस्फोट अब भी हो रहे हैं। इसी वजह से यह तस्वीर दिखी।

नासा की तस्वीरों में भी दिखे थे सबूत-

ब्रैंडन की इस थ्योरी को और बल उस वक्त मिला जब 2015 में नासा ने कुछ तस्वीरें जारी कीं। इनमें कुछ ऐसे संदिग्ध स्ट्रक्टर सामने जो रोशनी को परावर्तित कर रहे थे। इनके बारे में कहा गया कि ये संदिग्ध ढांचे धातु के बने हैं। ये वहां रहने वाली सभ्यता ह्यूमनोइड के अवशेष हैं जो परमाणु युद्ध के बाद अचानक से पूरी तरह साफ हो गई थी।

नदियों के सबूत भी मिल चुके हैं, नासा 1976 से जानता है सच-

आपको पता ही होगा कि मंगल ग्रह की तस्वीरों में वहां सैकड़ों नदियां होने के सबूत मिल चुके हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये नदियां परमाणु विस्फोट की गरमी से सूख गई होंगी। वहीं ब्रैंडन का तो ये भी कहना था कि नासा इस सच को 1976 से ही जानता है। उसने ये बातें लोगों से छिपाकर रखी हैं…

अगर आपको यह न्यूज पसंद आई तो आप इसको शेयर कर सकते हैं..ऐसी ही और न्यूज को जानने के लिए आप मुझे फॉलो भी कर सकते हैं। धन्यवाद।।

Leave a Reply

Your email address will not be published.