बांसपर गांव की रहस्यमई घटना

सबसे बड़ा और रहस्यमय सवाल, जिसका संपूर्ण जवाब किसी के पास नहीं है। सवाल यह कि आखिर इंसान की मौत के बाद क्या होता है। सवाल यह कि क्या वाकई मृत्यु के बाद आत्मा को या तो स्वर्ग या तो नर्क भुगतना पड़ता है। सवाल यह है कि क्या सच में ऐसा होता है की कुछ आत्माओं को ना तो स्वर्ग और ना ही नर्क जाने को मिलता है।

क्या वह वाकई हमारे साथ इस मृत्युलोक पर रहते हैं। क्या वाकई भूत-प्रेत, आत्माएं और अदृश्य शक्ति होती हैं। अगर इन सवालो का जवाब हां है, तो आखिर आजतक भूत प्रेतों के होने की बात को पूर्ण सहमति क्यों नहीं मिली। अगर इन सवालो का जवाब ना है, तो आखिर क्यों लोगों को इनके होने का आभास होता है। ऐसे लोगों की कई कहानियों को आप सभी ने कभी ना कभी किसी ना किसी माध्यम से सुना ही होगा।

आज के इस आर्टिकल में हम भी आपको कुछ ऐसी ही रहस्यमई और डरावनी जगह के बारे में बताने वाले है। एक ऐसी जगह जहां भूतों की तादाद एक या दो नहीं बल्कि यहां भूतों की पूरी की पूरी बरात के होने का दावा किया जाता है। यह जगह उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के एक छोटे से गांव “बांसपर” में मौजूद है। इस गांव की पूर्वी दिशा में एक बहुत बड़ा आम के पेड़ों का बगीचा है।यह बगीचा एक वक्त गांव के लोगों और राहगीरों को सुकून की छाया और मीठे फल देता था।

आज से लगभग 20 साल पहले यहां एक ऐसी घटना घटी जिसने इस सुंदर बगीचे को हमेशा-हमेशा के लिए एक ऐसी जगह में तब्दील कर दिया, जहां ना तो कोई अब जाता है और ना ही इस जगह के बारे में कोई बात करना पसंद करता है। यहां अब सिर्फ भूतों और प्रेत आत्माओं का वास है। इस बगीचे के आसपास रहने वाले निवासी यह दावा करते हैं की यहां सूर्यास्त के बाद परिंदा भी पर नहीं मारता है।

इस घटना की शुरुआत सन 1997 में हुई थी। “सुभाष कांता” नाम के एक व्यक्ति बेटी का विवाह “महात्तम यादव” से होना तय हुआ। घर में शादी की तैयारियां बड़े धूमधाम से चल रही थी। जल्द ही वह दिन आ गया जब सुभाष कांता की बेटी का विवाह था। बारात सुभाष कांता के घर के पास ही एक स्कूल पर पहुंच चुकी थी, जहां बारात के विश्राम का बंदोबस्त किया गया था। यहां विश्राम करने के बाद बारात को कुछ ही दूर सुभाष कांता के घर पर जाना था।

उन दिनों गांव में यातायात की सड़क और मार्गो का अच्छा बंदोबस्त नहीं हुआ करता था। बरात के साथ आए गाजे-बाजे वाले और कुछ अन्य लोग एक ट्रॉली ट्रेक्टर पर सवार थे। बारात उस बाग की तरफ जाते कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ने लगी। बारात, बाग में मौजूद एक तालाब के पास से गुजरती हुई कच्ची सड़क तक पहुंची, लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी को आशंका नहीं थी। ट्रॉली ट्रेक्टर के बड़े-बड़े पहिए जैसे ही तालाब के किनारे की सड़क तक पहुंचे वैसे ही वह कच्ची सड़क एक तरफ से धंस गई।

वह ट्रॉली ट्रेक्टर उस तालाब में पलट गया। इस घटना में ट्रॉली में बैठे अधिकांश लोग मारे गए। चंद मिनटों में हर्षोल्लास का माहौल मातम में बदल गया। इस दुखद घटना में 14 लोगों की मौत हो गई। मौत और मातम की काली छांव में वह शादी तो हो गई, लेकिन डोली के साथ मरे हुए लोगों की अर्थियां भी वापस गई। उन अर्थियों में मरने वाले लोगों का शरीर तो चला गया, लेकिन उन मृतकों की आत्मा वही उस बाग में रह गई।

इस बात का लोगों को तब पता चला जब सितंबर महीने की एक रात को अचानक आस-पास के गांव वालों को कहीं दूर से बैंड-बाजो और लोगों की हर्षोल्लास से भरी आवाजें सुनाई देने लगी। उस समय में गांव में लाइट्स का इंतजाम भी नहीं हुआ करता था, तो ऐसा तो मुमकिन ही नहीं था कि लोगों को सुनाई देने वाली आवाज किसी साउंड सिस्टम या टीवी की हो। साथ ही सितंबर महीने के समय में हिंदू पत्रिका के अनुसार कोई भी शादी नहीं की जाती है।

तो आखिर यह आवाजें आ कहां से रही थी, इस बात की जिज्ञासा में एक व्यक्ति उन आवाजों की दिशा में आगे बढ़ने लगा। देखते ही देखते वह उसी आम के बगीचे में पहुंच गया जहां वह दुखद हादसा हुआ था। उस बगीचे में उसने जो देखा वह देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई। उस बगीचे में बहुत से लोग बैंड-बाजा बजाते हुए नाचते गाते जा रहे थे। उन लोगों के चेहरे पर खुशी की जगह दुख के भाव थे। वह व्यक्ति अबतक समझ चुका था कि वह जो देख रहा है वो कोई मामूली घटना नहीं है।

वह यह जान चुका था कि वो उन्हीं मृतकों के भूत को देख रहा है, जिनकी कुछ समय पहले ही इसी बगीचे में मौत हुई थी। इस भयानक दृश्य को देखकर वह वहां से भाग खड़ा हुआ, लेकिन तब भी बैंड बाजे की आवाज कम नहीं हुई। उस व्यक्ति को ऐसा आभास हो रहा था की भूतों की वह बारात अब भी उसके पीछे-पीछे चल रही है। काफी दूर निकल आने के बावजूद वह आवाजें साफ-साफ सुनाई दे रही थी। उसे ऐसा लग रहा था कि मानो वह उन भूतों की बारात के बीचों-बीच फस गया हो।

अपने गांव में दाखिल होते ही उसने अपनी आपबीती सभी लोगों को बताना शुरू किया। सुनने वालों को भी उसकी बातों पर पूरी तरीके से विश्वास नहीं हुआ। अगली सुबह सभी लोगों ने एक साथ उस बगीचे में जाने का फैसला किया। सुबह उस बगीचे में पहुंचकर गांव वालों ने पाया की बगीचे के तालाब के पास कीचड़ से सने पैरों के निशान थे। रात के समय कोई भी उस तालाब के आसपास नहीं जाता था, तो फिर पैरों के इतने सारे निशान कहां से आए। यह देख लोगों को यकीन हो गया कि वह व्यक्ति सच बोल रहा था।

अपनी आपबीती सुनाने के लिए वह व्यक्ति ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहा। उस बेहद डरावनी घटना को देखने के बाद उस व्यक्ति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं रहा। उसे हर रात वहीं बैंड बाजे की आवाजें सुनाई देती थी। वह व्यक्ति रात में अचानक उस बगीचे की तरफ तेजी से भागने लगता था। इस दुखद और डरावनी घटना के बाद सबको यह मालूम हो गया की उस बगीचे में मारे गए लोग जाग गए हैं और तभी से इस बगीचे में ना जाने की हिदायत सभी को दी जाती है।

इन सबके बावजूद पिछले 20 सालों में इस भुतहा बगीचे ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया है। आसपास के गांव के लोगों का दावा है कि जो भी उन आवाजों का पीछा करते हुए रात के समय उस बगीचे के पास जाता है, वह फिर कभी पहले जैसा नहीं लौटता है। या तो वह व्यक्ति अपना दिमागी संतुलन खो बैठता है या फिर प्रेत आत्माओं की गिरफ्त में आ जाता है।

आज भी यहां रात के समय लोगों को उस भयानक बैंड बाजे की आवाज सुनाई देती है और आज भी यहां के लोगों की रातें डर के काले साए में गुजरती हैं। भूत प्रेत जैसी चीजों के बारे में आप लोग अपनी राय हमारे साथ कमेंट के माध्यम से शेयर कर सकते हैं।

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