प्रकाश किरणों की रफ़्तार के बारे में ये नहीं जानते होंगे आप

अल्बर्ट आइन्स्टीन ने जब पहली बार यह मालूम किया कि प्रकाश की रफ्तार पूरे ब्रह्मांड में एक समान होती है, तो उन्होंने इसकी सीमा भी बताई थी- 2,99,792 किमी प्रति सेकेंड। इतनी गति से एक सेकेंड के भीतर धरती के आठ चक्कर लगाए जा सकते हैं। लेकिन यह जानकारी सिर्फ एक शुरुआत थी। प्रकाश किरणों के बारे में अभी और भी बहुत कुछ मालूम होना बाकी था।

आइन्स्टीन से पहले द्रव्यमान यानी अणुओं को अलग करके देखा जाता था और आप जानते हैं कि इन्हीं अणुओं से हम, आप और बाकी सब कुछ बना है। लेकिन, 1905 में आइन्स्टीन ने ब्रह्मांड को देखने का नज़रिया ही बदल दिया। आइन्स्टीन ने ऊर्जा एवं द्रव्यमान को एक सरल समीकरण E=mc² में प्रस्तुत कर दिया था। इस समीकरण से ज़ाहिर हुआ कि द्रव्यमान वाली कोई भी चीज़ उतनी तेज़ नहीं चल सकती, जितनी कि प्रकाश।

प्रकाश के लगभग बराबर गति लार्ज हैडरॉन कोलॉइडर और टेवाट्रॉन जैसे शक्तिशाली पार्टिकल एक्सेलेरेटर में पाई जाती है। इनमें सब-एटॉमिक पार्टिकल की गति प्रकाश की गति के 99.99% से अधिक पहुंच जाती है। लेकिन जैसा कि भौतिकी के नोबेल पुरस्कार विजेता डेविड ग्रॉस ने कहा था कि इन पार्टिकल की गति कॉस्मिक स्पीड लिमिट तक कभी नहीं पहुंच पाएगी। ऐसा होने के लिए अनंत ऊर्जा चाहिए और इस प्रोसेस में पदार्थ का द्रव्यमान भी अनंत हो जाएगा, जो कि असंभव है।

प्रकाश कण यानी फोटॉन, प्रकाश की रफ्तार से इसलिए चल पाते हैं, क्योंकि वे द्रव्यमान-रहित होते हैं। जब कोई चीज़ ध्वनि की गति से तेज़ गति से चलती है, तब एक सोनिक बूम पैदा होता है।

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