नई रिसर्च में वैज्ञानिक का खुलासा, इस बड़ी वजह से पृथ्वी पर अब तक नहीं पहुंच सके परग्रही

पृथ्वी पर लगातार परग्रहियों की खोज चल रही है। यहां से लगातार कई मिशन भी भेजे जा चुके हैं। हालांकि परग्रहियों को ढूंढ़ने के कई दावे तो हुए हैं लेकिन अब तक साफ तस्वीर कभी सामने नहीं आई है। अब एक बड़े शोधकर्ता वैज्ञानिक ने दावा किया है कि परग्रही कभी पृथ्वी पर नहीं दिख सके, इसकी एक बड़ी वजह है। उन्होंने इस वजह को अपनी रिसर्च में बताया है।

जर्मनी के वैज्ञानिक का दावा, आकाशगंगा में हैं विकसित जीव

परग्रहियों के संबंध में बड़ा खुलासा जर्मनी के वैज्ञानिक ने किया है। उनका नाम माइकल हिपिक है। वो जर्मनी की सोनबर्ग वेधशाला में रिसर्च करते हैं। उन्होंने एक शोध किया है जिसमें वो सालों से लगे थे। शोध पूरा होने पर उन्होंने बताया कि दूसरी आकाशगंगा यानि गैलेक्सी में जीवन भी है और विकसित सभ्यतायें भी हैं लेकिन वो हमारी आकाशगंगा और पृथ्वी तक नहीं आ सकती हैं।

अपने ही ग्रह में फंस गये हैं परग्रही

उनका दावा है कि जिन ग्रहों को हम सुपर अर्थ कहते हैं, वहां जीवन तो यकीनन मौजूद है। हमारे जैसे विकसित प्राणी भी हैं लेकिन वो वहां के वातावरण की वजह से फंसकर रह गये हैं। उनका कहना है कि दूसरी आकाशगंगा के बड़े-बड़े ग्रहों में गुरुत्वाकर्षण बल यानि ग्रेविटी हमारी धरती से हजारों गुना ज्यादा है। बड़े ग्रहों में ज्यादा ग्रेविटी की वजह से वो लोग दूसरी आकाशगंगा तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं।

अपोलो जैसे मिशन के लिए चाहिए होगा साढ़े चार लाख टन ईंधन

वैज्ञानिक माइकल हिपिक के शोध के मुताबिक आकाशगंगा के सुपर अर्थ जैसे ग्रहों पर गुरुत्वाकर्षण बल इतना ज्यादा है कि आप चौंक जायेंगे। उनका कहना है कि नासा के अपोलो मिशन जैसे रॉकेट लॉन्च करने के लिए उनको साढ़े चार लाख टन ईंधन की जरूरत होगी। इतना ईंधन एक बार में ले जाना अपने आप में बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगा।

रेडियो सिग्नल और लेजर बीम से भेजते होंगे संदेश

वैज्ञानिक का कहना है कि इतने ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से उन ग्रहवासियों के पास सैटेलाइट टीवी, हबल टेलीस्कोप या मून मिशन जैसी चीजें नहीं होंगी। उनके ग्रह इतने बड़े हैं कि उसमें सैकड़ों धरती समा सकती हैं। ज्यादा ग्रेविटी की वजह से वो दूसरी आकाश गंगा के ग्रहों से रेडियो सिग्नल और लेजर बीम की मदद से ही संपर्क कर सकते हैं।

कई बार मिलने वाले संदेश उनके ही तो नहीं

आपने कई बार सुना होगा कि कुछ अजीब से रहस्यमयी सिग्नल हमारे वैज्ञानिकों को मिल चुके हैं। हाल ही में अॉस्ट्रेलिया में भी ऐसा ही सिग्नल मिला था। इनकी पड़ताल से साफ हो चुका है कि ये धरती के सिग्नल नहीं हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि ये रेडियो संदेश उन्हीं परग्रहियों के हों जो ग्रेविटी की वजह से अपने ही ग्रह में फंस कर रह गये हैं..अगर आपको यह न्यूज पसंद आई तो आप इसको शेयर कर सकते हैं। ऐसी ही और खबरों को जानने के लिए आप मुझे फॉलो भी कर सकते हैं। धन्यवाद।।

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