चन्द्रमा के अंधकार में डूबे उस हिस्से का रहस्य, जो पृथ्वी से कभी नहीं दिखता.

एलियन की खोज इन दिनों वैज्ञानिकों ने बहुत तेज कर दी है। लेकिन आप सोचिए कि आपको ये सारी जानकारियां कहां से मिलती हैं। ज्यादातर जानकारियां नासा देता है या किसी देश की सरकार। लेकिन क्या हो अगर ये जानकारी देने वाले जानते बहुत कुछ हैं लेकिन दुनिया को जानकारी नहीं देते और अंधेरे में रखते हों। कुछ ऐसी ही चौंका देने वाली जानकारियां छिपी हैं चांद पर जिनको हमसे छिपाया गया है।

दोस्तों पृथ्वी से चन्द्रमा का जो हिस्सा हमको दिखता है या दिखाया जाता है, वो बस एक भाग है जो हमेशा हमको नजर आता है। लेकिन कभी उसके दूसरे भाग की बात ही नहीं की गई। यह वो हिस्सा है जो हमेशा अंधेरे में ही डूबा रहता है। षड्यंत्रकारी थ्योरी पर यकीन करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा है कि इस हिस्से में परग्रही बस्तियां हैं।

अमेरिका-रूस जानते हैं यह सच्चाई

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका और रूस के प्रमुख इस सच्चाई को जानते भी हैं। हाल ही में परग्रहियों पर रिसर्च करने वाले अमेरिका के पैराडिग्स रिसर्च ग्रुप के संस्थापक स्टिफन बैसट ने एक बड़ी बात कहकर तहलका मचा दिया था। बैसट का दावा था कि अमेरिका और रूस लगातार एलियन के संपर्क में हैं। इतना ही नहीं उनका यह भी कहना था कि जल्द ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस बात का खुलासा भी करेंगे।

दोनों देश करते हैं एलियन टेक्नोलॉजी का प्रयोग

स्टिफन बैसट का एक और चौंकाने वाला दावा है कि दोनों ही देशों के पास जो उन्नत तकनीक है, वो कहीं और से नहीं एलियनों से ही मिली है। उनका कहना है कि गुप्त शोध में पता चला है कि दोनों ही देश दुनिया के सभी देशों से तकनीक में बहुत आगे हैं लेकिन वो इसका प्रदर्शन नहीं करते हैं। अमेरिका के पास तो एलियन की वो टेक्नोलॉजी है जिससे वे समय में यात्रा भी कर सकते हैं।

नासा को चांद पर ही मिल गये थे एलियन

वैज्ञानिकों का दावा है कि नासा ने चांद पर खोज के लिए अपोलो मिशन चलाया था। जिनमें 1969 वाला मिशन तो पूरी तरह झूठ था। हालांकि नासा ने बाद में अपोलो 12 मिशन को चांद पर भेजा था तभी उसको वहां कुछ अजीब सी चीजें दिख गई थीं। हालांकि नासा ने इस बात को पूरी दुनिया से छिपा लिया था और ये राज बस नासा और बात में रूस को पता लग गये थे।

अपोलो मिशन 13 और 16 में हुआ था सम्पर्क

वैज्ञानिकों का दावा है कि नासा ने जब अपोलो मिशन 13 भेजा तो अमेरिका को वहां परग्रही होने के सबूत मिल गये थे। इसके बाद नासा ने अपोलो मिशन 16 को चांद के उस हिस्से में भेजा था जो धरती से कभी दिखता ही नहीं है। यहीं पर नासा को परग्रहियों की पूरी सभ्यता मिली थी। हालांकि परग्रहियों ने उनको यहां दोबारा न आने या हमले के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी थी।

बड़े देशों की हुई थी गुप्त बैठक

पैराडिग्स रिसर्च ग्रुप के संस्थापक स्टिफन बैसट का दावा है कि इस बात को लेकर बड़े-बड़े देशों की गुप्त बैठक भी हुई थी। इसमें अमेरिका ने सभी देशों के प्रमुखों को चांद की घटना की जानकारी दी थी। साथ ही यह समझौता भी हुआ था कि अब चांद पर कोई अपना मिशन नहीं भेजेगा। इसी के बाद अमेरिका ने भी अपना अपोलो मिशन पूरी तरह रद कर दिया था।

कैसै आई थी दुनिया के सामने यह जानकारी

वैसे तो नासा और रूस ने मिलकर इस जानकारी को पूरी तरह से दुनिया से छिपा लिया था लेकिन हर राज छिप नहीं सकता है। नासा में काम करने वाले एक वैज्ञानिक ने वहां पर ली गईं परग्रहियों की दो फोटो लीक कर दी थी। इन फोटो में उनके सिर बड़े-बड़े और आंखें तिरछी थीं। हालांकि इस मामले के बाद अमेरिकी एजेंसी नासा ने अपनी पूरी आर्काइव ही डिलीट कर दी थी।

इतनी उन्नत तकनीक के बाद भी क्यों नहीं जाते चांद पर

मित्रो, गौर करने वाली बात यह है कि इस समय नासा के पास ऐसी तकनीक है कि वो पूरे चांद पर कहीं भी जा सकता है। वहां से कुछ भी शोध के लिए ला सकता है लेकिन सोचिए नासा ने क्यों अपोलो 16 के बाद कभी वहां रिसर्च के लिए अंतरिक्षयात्रियों को नहीं भेजा। इस तथ्य पर गौर करें तो स्टिफन बैफट से लेकर अन्य वैज्ञानिकों की थ्योरी पर यकीन करना आसान हो जाता है…अगर आपको भी यह न्यूज पसंद आई तो आप इसको शेयर सकते हैं…ऐसी ही और खबरों को जानने के लिए आप subscribe भी कर सकते हैं। धन्यवाद।।

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