क्या आप जानते हैं हमारी और पड़ोसी गैलेक्सी की होने वाली है टक्कर ?

प्रकृति का नियम है जो पदार्थ बना है वह एक न एक दिन खत्म होगा। जैसे मनुष्य पैदा होता है और मर जाता है उसी तरह यह सम्पूर्ण ब्रम्हांड भी एक दिन खत्म हो जाएगा। इस ब्रम्हांड के दो बहुत ही डरावने पहलू हैं एक ब्लैक होल और दूसरा आकाशगंगा का टकराव। कोई ब्लैक होल एक पूरे सौरमंडल को निगल लेता है तो वही दूसरी तरफ आकाश गंगाओं का आपसी गुरुत्वाकर्षण से टकराव होता है । आप सोचते होंगे कि क्या फिर मिल्की वे यानी हमारी आकाश गंगा का भी टकराव होगा। तो इसका उत्तर है जी हाँ।

क्यों होगा टकराव ?-

हबल टेलेस्कोप की मदद से हमारी सबसे नजदीकी आकाश गंगा के सबसे करीबी एंड्रोमिडा गैलेक्सी का निरीक्षण किया जाने पर नासा ने पाया कि एंड्रोमिडा गैलेक्सी मिल्की वे की ओर 110 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से बढ़ रही है और इस हिसाब से चार सौ करोड़ वर्ष बाद वह मिल्की वे से टकरा जाएगी।

क्या हानियां होती है टकराव से?-

वैसे तो टकराव हर चीज का हानिकारक ही होता है। वस्तु जितनी बड़ी होगी नुकसान उतना ही अधिक होता है। टकराव होने पर हमारी आकाश गंगा के तारे और ग्रह सभी एंड्रोमिडा के तारों एवं ग्रहों से टकराएंगे। वहीं कुछ तारे और ग्रह इस गैलेक्सी से बाहर फेंक दिए जाते हैं । बहुत ही भाग्यशाली तारा या ग्रह सुरक्षित रह पाता है। यह टकराव कुछ ऐसा प्रतीत होता है मानो अरबों मेगाटन के असंख्य परमाणु बम फटे हों।

क्यो होता है टकराव?-

जैसा कि आपको पता है कि अंतरिक्ष में लगभग हर कारक एक दूसरे की परिक्रमा करता है। चंद्रमा ग्रह की, ग्रह तारे की और तारा आकाश गंगा के केंद्र की परिक्रमा करते हैं। आकाश गंगा का स्वरूप एक चपटी डिस्क की तरह होता है। और इसके केंद्र में एक ब्लैक होल होता है। जो सम्पूर्ण आकाश गंगा को एक निश्चित आकार देता है। ये आकाश गंगाएं ब्रम्हांड में स्वच्छंद विचरण करती हैं और जिस से ये किसी भी दिशा में चल सकती हैं । और प्रत्येक आकाश गंगा का अपना एक ग्रेविटी फील्ड यानी गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र होता है। यदि किसी आकाश गंगा के समान ध्रुव आपस में मिल गए तो ये एक दूसरे की तरफ खिंच जाती है और इनका टकराव हो जाता है।

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