क्या आप जानते हैं परमाणु बम का यह डरावना सच ?

परमाणु बम के नाम पर एक खौफनाक मंजर दिमाग में गूंजने लगता है। और हो भी क्यो न आखिर दुनिया में सबसे खतरनाक चीज जो है। हिरोशिमा और नागासाकी का मंजर हमें परमाणु बम से भली भांति वाकिफ कराता हैं | आज हम आपको बताते हैं कि परमाणु बम के अचंभित करने वाले तथ्य |

बम फटने पर बनी थी 700 मीटर ऊंची मशरूम की आकृति-

रोबर्ट ओपनहेमेर को परमाणु बम का जनक कहा जाता है । इसका आविष्कार प्रोजेक्ट मैनहट्टन के वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया था। यह द्वितीय विश्व युद्ध के समय की बात थी। और उस समय ऐसे हथियार की आवश्यकता थी जिसके आगे सब नेस्तनाबूद हो जाएं। दुनिया का पहला परमाणु परीक्षण 16 जुलाई 1945 को सुबह न्यू मेक्सिको के अलमोगार्डो में किया गया था। जब यह परीक्षण हुआ उस समय रोबर्ट ओपनहेमेर का दिल एक मिनट में 130 बार धड़क रहा था। क्योंकि इसके प्रतिफल से कोई भी परिचित नहीं था। जब परमाणु बम फटा तो लगभग 700 मीटर ऊँची मशरूम की आकृति बन गयी जो आग की लपटों से घिरी थी। इस बम में 20.11 किलोटन TNT का प्रयोग किया गया था | और इस बम का नाम “दी गैजेट ” था | जिस स्थान पर इस पहले बम का परीक्षण हुआ था उस स्थान पर ट्रिनिटी साइट नाम का मशहूर परमाणु बम म्यूजियम बना है | और यह केवल 12 घंटे खुलता है लेकिन अप्रैल के पहले शनिवार को केवल सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुलता है |

चन्द्रमा पर परमाणु गिराने की हुई थी कोशिश-

शीत युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपनी ताकत का नमूना पेश करने के लिए एक भारी परमाणु बम चन्द्रमा में गिराने की सोची | 1950 में न्यू मेक्सिको में जहा पहला परमाणु बम परिक्षण हुआ था वह बहुत अधिक मात्रा में लोगों की भीड़ होने लगी | उस स्थान से 80 कि.मी. दूर लोग उस परमाणु परिक्षण को देखने के लिए भारी संख्या में इकठ्ठा होते थे | जो मिसाइल परमाणु बम को ले जाती है उसकी रफ़्तार करीब 400 कि.मी. प्रति घंटा होती है | सन 1958 में अमेरिका का एक 3.9 मेगाटन का परमाणु बम गलती से जॉर्जिया के समुद्र तट में खो गया था | जो कुछ पर्यटक गोताखोरों को मिला था | उन्होंने इमरजेंसी नंबर डायल कर इसे अमेरिकन सरकार को सूचित किया और उसे डी फ्यूज किया जा सका | वह बम जो हिरोशिमा और नागा साकी में गिरे थे उनके नाम लिटिल बॉय और फैट मैन था |

परमाणु बम के हानिकारक प्रभाव-

एक्स रे और सी.टी. स्कैन करने पर शरीर पर उतना रेडिएशन का प्रभाव पड़ता है जितना एक परमाणु बम के फटने पर 3 कि.मी. दूर खड़े व्यक्ति पर पड़ता है | एक परमाणु बम फटने पर इतनी आवाज होती है जो हमारे कान किसी भी हालत में नहीं झेल सकते | कान के परदे तुरंत फट जायेंगे | आमतौर पर आदमी अधिकतम 120 डेसिबल तक की ही आवाज सुन सकते हैं | पर एक परमाणु बम फटने पर 280 डेसिबल तक की ध्वनि उत्पन्न होती है जो हमारे कान के पर्दों के चीथड़े उड़ने के लिए पर्याप्त है | परमाणु बम की आवाज सुपरसोनिक होती है अर्थात उसकी धमाके की आवाज सुनने से पहले हम मर जायेंगे | परमाणु बम फटने वाले स्थान से हवा को पूरी तरह सोख लिया जाता है और इस से अधिक वायु दाब वाले स्थान से उस स्थान की और बड़ी तेजी से हवाएं चलती हैं इस कारण यह बहुत अधिक तबाही होती है | परमाणु बम फटने वाले स्थान से 60 कि मी. दूर के लोग बहरे हो जाते हैं |

दोस्तों उम्मीद है आर्टिकल आपको पसंद आए तो इसे लाइक करें और दोस्तों के साथ शेयर करें | और ऐसे ही आर्टिकल आगे भी पढने के लिए हमें फॉलो करना मत भूलें |

Leave a Reply

Your email address will not be published.